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दिल्ली में मॉनिटर लिज़र्ड मिला है, जिसे देखते ही लोगों के पसीने छूट गये। जी हाँ, आपको बता दें कि उत्तरी दिल्ली स्थित दिल्ली जलबोर्ड के चंद्रावल प्लांट में बेहद ज़हरीला जंतु मॉनिटर लिज़र्ड मिला है, जिसके दिखने से भयंकर हड़कंप मच गया। बोर्ड के अधिकारियों ने इसकी सूचना तुरन्त मजनू का टीला स्थित चौकी पुलिस के अधिकारियों को दी। पुलिस ने तुरन्त वाइल्ड लाइफ़ के अधिकारियों को सूचना दी और फिर दोनों पुलिस और वाइल्ड लाइफ़ की टीम मौके पर फौरन मौक़े पर पहुँच गयी, जिसके बाद उस मॉनिटर लिज़र्ड को पकड़ने का प्रयास किया जाने लगे। कुछ समय की जद्दोजहद के बाद पुलिस और वाइल्ड लाइफ़ की टीम ने तीन फुट के मॉनिटर लिज़र्ड को पकड़ने में क़ामयाबी हासिल कर ली, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की साँसें लीं।
आपको बता दें कि मॉनिटर लिज़र्ड को हम गोह के नाम से भी जानते हैं और यह प्रायः इसी नाम से प्रचलित है। गोह सरीसृपों के स्क्वामेटा गण के वैरानिडी कुल का जीव है, जिनका शरीर छिपकली की तरह, लेकिन उससे बहुत बड़ा होता है। ये अफ़्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अरब और एशिया में फैले हुए हैं। भारत में इनकी छ: प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें कवरा गोह सबसे प्रसिद्ध है। इसके बच्चे चटकीले रंग के होते हैं, जिनकी पीठ पर बिंदियाँ पड़ी रहती हैं और जिन्हें हमारे देश में लोग 'बिसखोपरा' नाम का दूसरा जीव समझते हैं। लागों का ऐसा विश्वास है कि बिसखोपरा बहुत जहरीला होता है, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं। बिसखोपरा कोई अलग जीव न होकर गोह के बच्चे हैं, जो जहरीले नही होते।
मॉनिटर लिज़र्ड छोटे-बड़े सभी तरह के होते है, जिनमें से कुछ की लंबाई तो 10 फुट तक पहुँच जाती है। ग़ौरतलब है कि मॉनिटर लिज़र्ड बड़े ही ग़ुस्सैल स्वभाव वाले होते हैं, इसलिए इनसे ख़तरा बना ही रहता है। आपको बता दें की गोह पानी में रहती है, जो तैराकी में दक्ष होती है और तेज धावक होती है। यह पेड़ पर चढ़ने में भी माहिर होती है।
दिलचस्प है कि पुराने समय में पुराने समय में जो काम हाथी-घोडे नहीं कर पाते थे, उसे मॉनिटर लिज़र्ड आसानी से कर देते थे। यह भी जानने काफी मज़ेदार है कि इनकी कमर में रस्सा बांधकर दीवार पर फेंक दिया जाता था और जब ये अपने पंजों से जमकर दीवार पकड लेती थी, तब लोग रस्सी के सहारे ऊपर चढ़ जाते थे।
Author: Amit Rajpoot
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