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जी हां अगर आप अपनी लाइफ में एसा कुछ देखना चाहते हैं जिससे देखकर मजा आ जाए तो लखीमपुर का ओयल मंदिर आप का इंतजार कर रहा है। 11वी शताब्दी में बने इस मंदिर को राजा बख्श सिंह ने बनवाया था।
मंदिर की आस्थाएं हैं, मान्यताएं हैं और यह पूरे एशिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां तंत्र—मंत्र करने के लिए लोग आते हैं। मढोक तंत्र पर आधारित यह मंदिर सीतापुर और लखीमपुर के बीच में स्थित है। ओयल एक कस्बा है और इसी कस्बे में यह मंदिर बना है।
वैसे तो आमतौर पर यहां सन्नाटा रहता है और इक्का दुक्का लोग ही यहां आते हैं लेकिन दीपावली और शिवरात्रि पर यहां की रौनक देखते ही बनती है। पूरे मंदिर को दियो से सजाया जाता है और लोगा पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर में बना शिवलिंग अपना रंग बदलता रहता है। इस मंदिर की खास बात एक और है मंदिर का छत्र पहले सूर्य के साथ घूमता था लेकिन टूट जाने के कारण अब ऐसा नहीं होता।
मंदिर बनाने के लिए वैसे ढेर सारी मान्यताएं हैं लेकिन इतिहासकार कहते हैं कि जंग में जीते पैसों के सही इस्तेमाल करने के लिए ओयल स्टेट के राजाओं ने इस बनाया था। इसके पीछे बनाने की सक बात और सामने आती है और वह है कि आकाल के समय मंदिर में बना कुआ लोगों को पानी पिलाने के काम आता है।
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